Ashwini Dev Pandey

Ashwini Dev Pandey

Monday, February 22, 2010

नवजात की मौत से खुली मिशनरी हॉस्पिटल के रियायती चिकित्सा की पोल

नवजात की मौत से खुली मिशनरी हॉस्पिटल के रियायती चिकित्सा की पोल
सोनभद्र के राबर्ट्सगंज जैसे अति पिछड़े इलाके में स्थित जीवन ज्योति मशिही हॉस्पिटल की पोल उस समय खुली जब ३ दिन के नवजात शिशु की मौत डाक्टरों की लापरवाही और वहा मौजूद नर्शो के अनभिज्ञता के कारन हो गयी. गौरतलब है की यह हॉस्पिटल उन मिशनरी अस्पतालों की श्रेणी में आता है जो गरीबो को रिआयति चिकित्सा उपलब्ध कराने का दावा करती है, और गरीब मरीजो का शोसन कर अपना उल्लू सीधा करते हैं.
राबर्ट्सगंज निवाशी एक परिवार अपनी गर्भवती पत्नी का इलाज स्थानीय, जीवन ज्योति हॉस्पिटल में पिछले कई महीनो से करा रहा रहे थे , हर महीने इलाज के दौरान १५०० से २००० रुपये वसूलता था, इनके अनुसार डाक्टरों ने बताया उनकी पत्नी को जुड़वाँ बच्चे हैं जिसे उनके परिवार में काफी ख़ुशी का माहोल था, ध्यान रहे यह वही अस्पताल हैं जो प्रभु इशु की दुहाई का दावा करता है लेकिन शायद मॉलदार मरीजो को देखकर उनकी भी लार टपकने लगती है.
मिशन हॉस्पिटल का असली रूप उस समय सामने आया जब अकस्मात् एक रोबर्ट्सगंज निवासी परिवार की पत्नी की तबियत २९ जनुअरी २०१० को अचानक ख़राब हो गयी और हॉस्पिटल ले जाने पर फ़ौरन बड़ा ऑपरेशन करने की बात कही, जबकि डाक्टर ने डेलिवेरी की तारीख १६ फरवरी को दी थी .और उनसे काउंटर पर फ़ौरन ८००० रुपये जमा करने को कहा परिजनों ने काउंटर पर पुरे पैसे जमा कर दिए और फिर देर रात ऑपरेशन के दौरान महिला को जुड़वाँ लड़के पैदा हुवे. डाक्टरों द्वारा बताया गया की बच्चे थोडा कमजोर हैं पर घबराने की बात नहीं है अक्सर जुड़वाँ बच्चो के साथ ऐसा होता है और फिर माँ को उन्होंने वार्ड में सिफ्ट कर दिया और तब तक उनसे दवा इत्यादी के नाम पर १५,००० ऐठा जा चूका था . १ दिन बाद बच्चो को भी आइ सी यू से निकाल कर वार्ड में माँ के पास भेज दिया गया ,सब ठीक चल रहा था अचानक उनका छोटा बेटा २ जनुअरी को शुबह कुछ सुस्त था ९ बजे डॉक्टर ने चेक किया तो बताया की बच्चा ठीक है बच्चे कभी कभी चुप रहते है कोई बात नहीं है, बच्चे की तबियत बिगडती गयी और नर्स ने १२ बजे दोपहर में चेक किया और कहा बच्चा ठीक है फिर जब लेडी डॉक्टर ४ बजे शाम को चेकअप के दौरान आई तो कहा की आपके बच्चे की हालत काफी ख़राब है इसे फ़ौरन किसी बड़े अस्पताल में ले कर जाइये अब हम कुछ नहीं कर सकते और उसे वाराणसी के लीए रेफर कर दिया , इसे सुनकर महिला का परिवार काफी घबरा गया और अपने बच्चे को लेकर फ़ौरन वाराणसी लेकर भगा पर बच्चे ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया , वाराणसी सिंह रिसर्च सेंटर में पहुचने पर डॉक्टर ने बताया आपके बच्चे को पीलिया हो गया था और अगर आप १ घंटे पहले आये होते तो आपके बच्चे को बचाया जा सकता था. पुरे परिवार में गम का माहोल छा गया . दुसरे दिन जब महिला के परिवार वाले जब अपने दुसरे बच्चे के स्वास्थ की जानकारी लेने पहुंचे तो डॉक्टरो ने कहा की आपका दूसरा बच्चा काफी कमजोर था उस वजह से उसे बचाया नहीं जा सका पर आपका ये बच्चा ठीक है इसे कोई समस्या नहीं है .पर परिवार वालो को उनकी बात पे भरोसा न था और उन्होंने अपने बच्चे को किसी दुसरे अस्पताल में दिखाने की बात कही तो मिशन के डाक्टरों द्वारा कहा गया की नहीं उसे कही लेकर मत जाइये उसे कुछ नहीं हुआ है और हमने उसे आइ सी यू में एडमिट कर लिया है पर उन्होंने अपने बच्चे को जबरन वहा से निकाल कर राबर्ट्सगंज के निजी अस्पताल नेशनल बाल चिकित्सालय में चेकअप कराया तो रिपोर्ट में पता चला की बच्चे को १३.५ पीलिया हो चूका है अगर आप इसे थोड़ी देर और रखते तो इसका बचना भी मुस्किल था. अब इसे आप क्या कहेंगे की गलती किसकी है मिशन अस्पताल के डाक्टरों से परिवार के पूछने पर की आखिर इस बच्चे को पीलिया है और आपके यहाँ नोर्मल बताया जा रहा है ऐसा क्यूँ ? तो डाक्टर ने बताया की हमारे अस्पताल में चाइल्ड स्पेसलिस्ट न होने की वजह से कभी कभी दिक्ते आ जाती हैं जब हमसे केश हैंडल नहीं हो पाता तो हम मरीज को रेफ़र कर देते हैं .
अब आप ही सोचिये इस देश में अगर ऐसे अस्पताल की संख्या पर रोक नहीं लगायी गयी तो देश का भविष्य कैसा होगा जहा सरकार का कहना है की भारत बच्चो के मामले में शून्य मृत्यु दर है ऐसे में इन जैसे मिशनरी अस्पतालों की गड़ना करना कैसे भूल सकता है इसका कारन बस हम और आप है जो बस कुछ होने पर थोड़ी देर के लीए उतावले होते हैं और कुछ दिन बीतने पर सब भूल जाते हैं .हमे एक जूट होकर इनके खिलाफ आवाज उठानी होगी .
अश्विनी देव पाण्डेय
सोनभद्र ९७९५५१२६०७


Thanks And Regards Ashwini Dev Pandey+91-9795512607