Ashwini Dev Pandey

Ashwini Dev Pandey

Tuesday, July 31, 2012


शिव द्वार ..
यह उमा- माहेश्वर कि ग्यारहवी शताब्दी में निर्मित लास्य शैली कि प्रतिमा है.. "शिवद्वार" भगवन शिव पार्वती का एक ऐसा अदभुत मंदिर है जिसके दर्शन के लिए जिले से ही नहीं बल्कि अन्य जिलो और प्रदेशो से भी लोग आते हैं अदभुत इसलिए है क्यूँ कि काले रंग कि प्रणय मुद्रा में शिव पार्वती कि ऐसी दूसरी मूर्ति पूरे भारत में देखने को नहीं मिलती सावन के महीने में तो दूर दूर से हजारो श्रद्धालु यहाँ जल चढाने के लीए आते हैं. सावन के दिनों में इस मंदिर में हजारो कांवरिये भगवान शंकर का जलाभिषेक करने के लीए आते हैं, इन दिनों यहाँ मेले जैसा माहौल रहता है. इस मंदिर में स्थापित इस मूर्ति का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि हर जगह तो लिंग कि रूप में भगवान शंकर कि पूजा होती है लेकिन यही एक मात्र ऐसा स्थान है जहा मूर्ति रूपी विग्रह के रूप में लोग दर्शन व् पूजन करने आते हैं. इस मंदिर कि महिमा अपरम्पार है तभी तो शिवद्वार में आने वाले भक्त यहाँ से कभी खाली हाँथ नहीं जाते यहाँ उमड़े हुवे भक्तो के सैलाब को देखकर आसानी से समझा जा सकता है कि काशी के बाद क्यूँ यहाँ इतनी ज्यादा तादाद में भक्त दर्शन करने आते है, वही जानकारों के मुताबिक ये मूर्ति खुदाई के दौरान मिली थी और इसे आदि शंकराचार्य ने स्थापित कराया था काशी के बाद इसी स्थान का सबसे ज्यादा महत्व है, शिव द्वार जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज से ४० किलोमीटर दूर घोरावल में स्थित है .......

Monday, August 15, 2011

Wish u a very very happy Independence Day


SHAHEEDON KI CHITAON PAR LAGENGE HAR BARAS MELE, WATAN PE MITNE WALON KA YAHI BAKI NISHAN HOGA




Sunday, June 5, 2011

Green revolution the best solution to arrest pollution

Monday, May 30, 2011

सोन नदी में खनन से जलचरो का जीवन संकट में

सोन नदी में खनन से जलचरो का जीवन संकट में
अवैध खनन के लीए बांधी गई नदी की धारा 

 
खनन के बारे में बात करे तो जनपद सोनभद्र जहा खनन का ही बोलबाला है चाहे वह बालू का खनन हो, पत्थरों की या फिर प्राकृतिक संपदाओ के दोहन की, उत्तर प्रदेश की उर्जा राजधानी कहा जाने वाला यह जनपद भरपूर खनिज संपदाओ का धनि है, लेकिन पिछले कुछ दशक से यहाँ यहाँ की पहाड़ो और जंगलो को काटकर नेस्तनाबूद करने के बाद प्रदेश के सफ़ेदपोश लोगो की नजर बालू के खनन पर है... इन सफ़ेदपोशो द्वारा सोन, कनहर, बिजुल, रेणु नदियो के प्रवाह को रोककर बालू खनन किया जा रहा है जिसमे शासन से लेकर प्रशासन तक के लोग पूर्ण सहयोग कर रहे हैं.. पंडित नेहरु का स्विट्जरलैण्ड कहे जाने वाले इस क्षेत्र के प्रतिबंधित क्षेत्रो में बालू का खनन बदस्तूर जारी है.........        
खनन माफियो द्वारा सोन नदी को बोल्डर व ह्युम पाइपो से पाटकर खनन व परिवहन किये जाने से नदी का जलस्तर आश्चर्यजनक ढंग से घट रहा है, नदी के कई किनारों पर मशीनो द्वारा बालू खनन किये जाने से नदी के बहाव में बाधा उत्पन्न हो चुकी है और साथ ही साथ जलचरो का जीवन खतरे में पड़ चूका है,खनन माफियो द्वारा नदी में खनन किये जाने से नदी के जल स्तर में लगातार कमी आती जा रही है आलम तो यह है कि नदी भी अब खुद कि प्यास तक नहीं बुझा पा रही है.. एक सुप्रसिद्ध संत रहीम जी क्या खूब कहना है रहिमन पानी रखिये बिन पानी सब सून लेकिन इन पंक्तियो का मतलब सिर्फ किताबो तक ही सिमित रह गया है क्यूँ कि इसका मतलब न तो खनन माफियाओ को पाता है नहीं यहाँ के आला अधिकारिओ को, बात करते हैं इन दिनों कि तो सोनभद्र के चोपन इलाके से होकर बहने वाली सोन नदी पर एक निजी कम्पनी द्वारा अपनी मशीनो को ले जाने के लिए एक अस्थाई पुल का निर्माण किया जा रहा है, इस कार्य में कम्पनी द्वारा पर्यावरण के नियमो कि पूरी तरह अनदेखी कि जा रही है, कम्पनी के लोगो द्वारा इस अस्थाई पुल के निर्माण के लिए हजारो पलास्टिक कि बालू भरी बोरिया नदी में डाली जा रही है जिससे न सिर्फ नदी के प्रवाह को खतरा उत्पन्न हो गया है बल्कि जलीय जन्तुओ के जान को भी खतरा उत्पन्न हो गया है, वही दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि जो उपकरण राज्य निगम के पुल से होकर नहीं जा पाते है ऐसे उपकरणों को पहुचाने के लीए नदी में इस तरह का पुल बनवाना ही एक मात्र रास्ता है .. प्रशासन का कहना है कि इस अस्थाई पुल के निर्माण से कोई नुकसान नहीं है. लेकिन जब प्रशासन का ध्यान इस तरफ आक्रिस्ट कराया गया कि पिछली बार सोन नदी में बनाये गए अस्थायी  पुल को काम पूरा होने के बाद भी नहीं हटाया गया तो जिलाधिकारी महोदय का कहना है कि इस बार इस बात को सुनिशिचित कराया जायेगा कि काम पूरा होने के बाद पुल को नदी से साफ कराया जा सके, सोनभद्र के सोन नदी का काफी हिस्सा कैमूर वन्य जिव विहार  में आता है जिसमे कि प्रशासन द्वारा किसी भी तरह का छेड़-छाड़ उचित नहीं है, लेकिन जिस तरह से निजी कंपनी के लोग प्रशासन कि मिली भगत से अपनी मनमानी कराते हुए अबैध पुल का निर्माण कर रहे है उससे न सिर्फ  स्थानीय लोग इस पुल के निर्माण से अपने आप को आशय महशुस कर रहे है वल्कि जिला प्रशासन भी इस बात को मान रहा है कि इस निर्माण से कोई नुकसान नहीं है... खनन इलाके में इस तरह के की पुल पहले ही बने हुए है जिससे कि नदी का  बहाव  लगभग रुक सा गया है .. जिससे न सिर्फ सोन नदी वल्कि पर्यावरण के नुकसान कि भी सम्भावनाये बढ जाती है...............
                                           
 

     

Monday, November 22, 2010

ऐतिहासिक धरोहर

ऐतिहासिक धरोहर

विजयगढ़ दुर्ग

उत्तर प्रदेश के जनपद सोनभद्र में स्थित विजय गढ़ और अगोरी जैसे किले जो न सिर्फ पर्यटन बल्कि पुरातात्विक अध्यन दृष्टि से भी महत्त्व पूर्ण होने के साथ साथ सांस्कृतिक व एतिहासिक विरासत को अपने अंतर में संजोये होने के बाद भी शासन की उपेक्छा का दंश झेल रहे हैं. समय रहते अगर ध्यान न दिया गया तो वह दिन दूर नहीं जब समाज के सुनहरे आतीत के ये आईने- किले जो खंडहर बन चुके हैं धरासाई होकर अपना अतीत भी खो बैठेंगे I
सुप्रसिद्ध उपन्यास कार देवकी नंदन खत्री के उपन्यास पर आधारित नीरजा गुलेरी के निर्देशन पर बनी प्रख्यात टी.वी. धारावाहिक चंद्रकांता की लोकप्रियता के बाद जनपद सोनभद्र से २० किलो मीटर दूर जंगल पहाड़ो पर स्थित इस विजय गढ़ दुर्ग की लोकप्रियता भी बढ़ गई , पहाड़ पर सैकड़ो फिट ऊंचाई पर स्थित विजयगढ़ दुर्ग के निर्माण को लेकर कोई वैधानिक या सही जानकारी नहीं मिल पाई है पर कुछ विद्वानों
का मानना है की इस दुर्ग का निर्माण तीसरी शताब्दी में आदिवासी राजाओ द्वारा कराया गया था I
महाकवि वाड़भट्ट की विन्ध्याहवी वर्डन में सबर सेनापतियो का उल्लेख है.
महाकवि वाड़भट्ट का साधना स्थल भी सोन तट ही रहा है I
राजनयिक और अंग्रेजी शासन काल के दौरान वाराणसी के राजा चेतसिंह
विजयगढ़ दुर्ग से भी तमाम धन सम्पदा लेकर ग्वालियर की तरफ प्रस्थान किये थे,

शेरशाह शूरी का अधिकार भी इस विजयगढ़ दुर्ग पर रहा है I
प्रतिवर्ष यहाँ मीराशाह बाबा का उर्ष लगता है जिसमे हजारो की संख्या में हिन्दू और मुस्लिम भाई आते हैं और परस्पर सदभाव से
इस उर्स मेले का आयोजन करते हैं I वरिस्ट साहित्यकार देव कुमार मिश्र ने अपनी पुस्तक सोन की माटी का रंग
में विजयगढ़ दुर्ग पर संत सैयद जैनुल आब्द्दीन की मजार होने के सम्बन्ध में उल्लेख किया गया है I श्री मिश्र ने लिखा है कि संत सैयद जैनुल आब्द्दीन शेरशाह शूरी के समय में थे और इनकी कृपा से ही बिना खून बहाए ही शेरशाह शूरी ने किले पर कब्ज़ा कर लिया था I

प्रतिवर्ष हजारो की तादात में शिव भक्त विजयगढ़ दुर्ग पर स्थित राम सरोवर तालाब से जल लेकर लगभग ६० किलोमीटर दूर स्थित शिवद्वार में भागवान शिव का जलाभिषेक करते है, जंगलो और पहाड़ो पर स्थित सैकड़ो फिट की उचाई पर स्थित इस सरोवर का पानी कभी कम नहीं होता है यह भी एक चमत्कार ही है जबकि इस पहाड़ के निचे उतरते ही यहाँ के स्थानीय लोगो को पेय जल के संकट का सामना
करना पड़ता है I
आदिवासी समाज के सुनहरे अतीत
का आइना अब खँडहर में परवर्तित होता जा रहा है पहाड़ पर बने इस दुर्ग को देखा जाये तो वास्तु कला का अद्वितीय उदाहरण देखने को मिलता है I
इस दुर्ग को समुद्रगुप्त ने चौथी सदी में जिस वन राज्य की स्थापना की थी उससे जोड़ कर भी
देखा जाता है I
तमाम विजयगढ़ और अगोरी किले के ऐसे
अनसुलझे सवाल हैं जो खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं I

विजयगढ़ दुर्ग पर बने राम सागर तालाब के अथाह जल सागर, इन किलो के निर्माण,
शिल्प कल खंड जानकारी के साथ, इसके वैज्ञानिक अध्यन के साथ पुरातात्विक व
वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता को भी नजर अंदाज किया जाता रहा है I
विजयगढ़ व अगोरी जैसे किले तमाम विरासत को अपने अंतर में संजोये
रखने के बाद भी शासन व प्रशासन के उपेक्छाओ का दंश झेल रहा है, शीघ्र
ही यदि इसपर ध्यान न दिया गया तो वह दिन दूर नहीं कि ये ऐतिहासिक
विरासत केवल इतिहास के पन्नो में ही देखने को मिलेंगे .....



Thursday, November 18, 2010

खतरे में सोनभद्र के वन्य जीव




खतरे में सोनभद्र के वन्य जीव
सोनभद्र के जंगल से सटे एक इलाके में इन दिनों जंगली भालू के आतंक से ग्रामीणों में दहशत है , पिछले दिनों इस भालू ने एक लड़की को गंभीर रूप से घायल कर दिया ग्रामीणों का कहना है कि अक्सर जंगली जानवर अपना रुख गाँव की तरफ करते हैं लेकिन वन विभाग इनकी सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं करता , कुछ दिनों पहले एक भालू अपने २ बच्चो के साथ महुअरिया जंगल से मराची गाँव कि तरफ आगये थे जिसमे भालू का एक बच्चा कुवे में गिर गया वन विभाग कि तरफ से भालू के बच्चे को तो कुवे से निकाल लिया गया लेकिन इनको जंगल का रास्ता न दिखा कर गाँव के आस पास ही छोड़ दिया गया जिससे ये भालू अभी भी गाँव के इर्द गिर्द देखे जा रहे हैं, दूसरी तरफ वन विभाग का कहना है कि जंगल में भोजन की कमी हो जाने के कारण जंगली जानवर गाँव की तरफ आ जाते हैं, वन विभाग के लोग ग्रामीणों को उनसे सावधान रहने के हिदायत दे रहे हैं, इसी तरह कि एक दूसरी घटना आज रात देखने को मिली जब एक लकडबग्घा जंगल से गाँव कि तरफ आ गया और सड़क पर उसकी लॉस लावारिस हालत में मिली . बाद में वन विभाग के रेंजेर ने बताया कि भोजन कि तलाश में यह इधर आया था और किसी वाहन की चपेट में आकर उसकी मौत हो गई .
इस के आलावा एक हाथी भी इन दिनों सोनभद्र के चोपन ,हथिनाला इलाके में देखा गया है बताया जाता है कि यह हाथी अपने झुण्ड से बिछुड़ कर छत्तीसगढ़ के जंगलो के रास्ते सोनभद्र में आ गया है पिछले दिनों इसने बभनी इलाके में इसने ग्रामीणों के कई घरो को तोड़ -फोड़ कर तबाही मचाई थी . वन विभाग इसे पकड़ने में अभी तक नाकाम है जब कि यह हाथी अभी भी सोनभद्र के अलग अलग गाँव में देखा जा रहा है,
पहली नजर में ग्रामीण इन जंगली जानवरों को ही दोषी मान कर इनकी हत्या को उतारू हो जाते है . जब कि इनके जंगलो से आबादी के इलाके में आने में इन निरीह जानवरों का कोई दोष नही है . वन विभाग लगातार वन भूमि के बढ़ने का दावा करता है लेकिन वास्तविकता यह है कि जंगलो की लगातर कटाई और पिछले ५ सालो से सूखे की स्थिति बने रहने से वन भूमि लगातार कम होती जा रही है .साथ ही साथ जंगलो में लोगो कि दखलंदाजी भी बढती जा रही है . वन विभाग और अन्य तमाम संगठन इन वन्य जीवो को बचने में नाकाम साबित हो रहे है .सोनभद्र में वन्य जीव बेमौत मारे जा रहे है. कहा है वन्य जीव संरक्षण के दावे करने वाले तमाम लोग और सरकारी विभाग ????
कहा है टी वी चेनलो पर पर्यावरण और बाघ बचाओ का नारा देने वाले शहरी लोग . जो बाघ कि फोटो छपी टी शर्ट पहन कर बाघ बचाने की अपील करते है . बाघ के आलावा भी अन्य निरीह जंगली जानवर है जो ख़त्म होने कि कगार पर है .इन्हें कौन बचाएगा ????
अगर हम सोनभद्र के प्रमुख स्थानोंपर एक नजर डाले तो हम पते है की यह के अधिकतर जगहों के नाम जानवरों और पशुओ से जुड़े है . यह तो सभी जानते है की जंगल और उनमे रहने वाले आदिवासिओ की संख्या को देखे तो सोनभद्र में इनका घनत्व उ.प्र में सबसे अधिक रहा है .लेकिन हाल के वर्सो में तस्वीर बहुत बदल चुकी है .जंगल कम से कमतर होते जा रहे है और वन विभाग कागजो पर ही वृक्षारोपड़ के आकडे पुरे करता रहा है . जो स्थान जानवरों के नमो से जाने जाते थे जैसे की हाथीनाला, तेंदू, गायघाट, बग्घानाला , सूअरसोत , हिरनखुरी अब केवल नाम के ही रह गये है. जानवर तो अब नदारद ही है .इसका कारण मनुष्यों की जंगलो में दखलंदाजी बढ़ते जाना है ,और जानवरों की जगह की कमी होना तो लाजमी ही है . लेकिन इस ओर किसी का ध्यान ही नही है .प्रशासन को आँख और कान मूंदकर यहाँ के प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुन्द दोहन में जुटा है होश तो तब आएगा जब यह बेजुबान जानवर भी नक्सलियो की तरह हिंशा पर उतारू हो जायेगा . और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी .
लेकिन अफ़सोस बेजुबान जानवर अपना प्रतिरोध
संगठित
रूप से नही दिखा सकते . हाँ आने वाले सालो में यह जरूर होगा की अब हाथी , लकड़बग्घे और सियार जैसे जानवर जो अब भी सडको पर दिख जाते है विलुप्त हो जायेगे और आने वाली पीढ़िया केवल सुना करेगी की सोनभद्र में भी कभी ये जानवर पाए जाते थे .केवल डिसकवरी जैसे चैनल में ही उनकी तस्वीर देखने को मिलेगी .

Monday, November 15, 2010

बड़ा हादसा






बड़ा हादसा
सोनभद्र के वाराणसी शक्तिनगर मार्ग पर (किलर रोड) के चोपन थाना छेत्र के डाला इलाके में एक सड़क हादसे में ट्रक के पलट जाने से ट्रक पर सवार सात बच्चो और एक युवती समेत आठ लोगो कि मौत हो गयी जबकि लगभग ४० लोग घायल हो गए इस घायलों में लगभग १ दर्जन लोगो कि स्थिति नाजुक बनी हुई है, मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी द्वारा मृतको के परिजनों को ५०-५० हजार रूपये मुख्या मंत्री रहत कोस से दिए जाने कि बात कही और घायलों के समुचित इलाज के लीए कहा
सोमवार को सोनभद्र में किलर रोड नाम से मशहूर वाराणसी शक्ति नगर मार्ग पर चोपन थाना छेत्र के डाला इलाके में कोयले से लदी ट्रक पलट गई इस ट्रक में लगभग साठ कि संख्या में मजदुर बैठे थे ये मजदुर तिल्गुडवा से राबर्ट्सगंज कोतवाली छेत्र के तेंदू गाँव में धान कि कटाई करने के लिए जा रहे थे , सड़क दुर्घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुँच कर घायलों को प्राथमिक उपचार के लीए स्वास्थ्य केंद्र चोपन में भर्ति कराया इस ट्रक में लगभग साठ कि संख्या में मजदुर बैठे थे ये मजदुर तिल्गुडवा से राबर्ट्सगंज कोतवाली छेत्र के तेंदू गाँव में धान कि कटाई करने के लिए जा रहे थे.